Unknown number short love story

                 
रोज रात को 2 बजे एक फोन आता है " तुने मेरे दिल से कयुँ खेला, तुझे पता है मैं तेरे से कितना प्यार करता हूँ, तुने मेरा दिल कयुँ तोड़ा. तुझे मैं कितना प्यार करता था, मैंने तो तेरे साथ कितने सपने सोचें थे, मैंने तो अपने बच्चों के नाम भी सोचे थे."  ये बात सुबह 4 बजे तक चलती है गलत नंबर बोलने पर भी. मैं उसे जानती भी नहीं हूँ फिर भी उसकी बातें सुनती हूँ. ये सिलसिला 2 हफते से चला रहा है. अब तो मुझे भी उसकी हर एक बात याद हो गई थी.


मैंने अपने घर पर  बात की, उनहोंने बोला कि मैं एक बार उस लडके से मिलूँ . अब मिला भी जाऐ तो कैसे पता भी होना चाहिए उसका ,ये मुश्किल भी खत्म हो गई भाई ने मोबाइल नंबर से घर का पता निकल कर दिया
अगले दिन ही मैं उसे मिलने को निकल गईं. बहुत उलझनें थी दिमाग में फिर भी मैं उस पते पर गईं. ड़ोर बेल बजाई तो एक औरत ने दरवाजा खोला. 


नमस्तस्यै मेरा नाम आरुही है ये अभीनव जी का घर है
उनहोंने बोला " जी हाँ पर आप कौन ", मैंने कहा " मैं उनकी दोस्त हूँ , मिलने आई हूँ उनसे ". अब अंदर जाने के लिए कुछ तो झूठ बोलना ही था. अंदर गई और जा कर सोफे पर बैठ गई.
"देवर जी आपसे मिलने आपकी दोस्त आई है " उस औरत ने कहा. सामने के कमरे से एक आदमी बाहर आया "ये ही अभिनव है" मैंने खुद से सवाल किया. मैंने हाय बोला और वो अकडू बोला कि तुम हो कौन और हम दोस्त कब बने !.
वो ईतनी जोर से मेरे पर चिलाया कि उसका पुरा परिवार वहाँ आ गया. जिंदगी में पहली बार कोई मेरे पर चिल्लाया था. उनकी माँ ने पुछा की तुम कौन हो, मैंने उनको सब बात बोल दी कि कैसे वो रात में मुझे काॅल कर के तंग करता है. वो बोला कि मैं झूठ बोल रही हूँ और ये सब पैसों के लिए कर रहीं हूँ. गुस्से में मैंने उनको काॅल रिकॉर्डिंग सुना दी, उनकी भाभी ने भी कहा कि उन्होंने कई बार उनके कमरे से बात करने की आवाज आती है. अभिनव बोले "ऐसा कुछ नहीं है". उनके भाई ने कहा " नशा कम करा करो तब याद रहेगा तुमे कुछ". बहस हुईं और उनहोंने ने माफी मांगी. उनकी माँ ने मुझे साथ में खाना खाने को कहा. हमने साथ में खाना खाया. उनकी माँ ने अभीनव को मुझे घर छोड़ कर आने को कहा. वो मुझे घर छोडने आऐ, हमने रास्ते में एक शब्द भी नहीं बोला. घर आ जाने पर मैं कार से उतरी और कहाँ कि शराब छोड़ दो, अपने लिए नहीं पर अपने परिवार के लिए पर वो अकडू कुछ न बोला और मुझे उतार कर वहां से चले गए.
आज एक हफ्ता हो गया है अब उनकी कॉल नही आई . मै अपने कमरे में बैठी ये सोच रही थी की माँ ने आवाज दी और मै कमरे से बाहर आई. हैरानी हुई अभिनव का पुरा परिवार वहाँ था. मेरा हाल कया था मुझे खुद भी नहीं पता था. अभिनव आगे आऐ और मेरा हाथ पकड़ कर बोले,  मैं अपनी सब गलत आदतें छोड़ दूंगा ,तुम मेरी आदत बन जाओ. मैंने कहा "तुम शादी कि बात कर रहे हो". उनहोंने कहा "हां".




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